व्रत · पारण · पूजा काल
व्रत कैलेंडर
अगले 12 महीनों के सभी एकादशी, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि, चतुर्थी, पूर्णिमा और अमावस्या — आपके स्थान के सूर्योदय, सूर्यास्त और चन्द्रोदय से गणना किए गए समय सहित।
गणना के नियम
- एकादशी: जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो (उदया तिथि, स्मार्त मत)। वैष्णव परम्परा (दशमी-विद्धा त्याग) में व्रत कभी-कभी अगले दिन होता है।
- पारण: अगले दिन सूर्योदय के बाद, द्वादशी के पहले चौथाई भाग (हरिवासर) के बीतने पर, द्वादशी समाप्त होने से पहले — यथासम्भव प्रातःकाल (दिन का पहला पाँचवाँ भाग) में।
- प्रदोष: जिस दिन सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल में) त्रयोदशी हो।
- मासिक शिवरात्रि: जिस रात निशीथ काल (रात्रि का आठवाँ मुहूर्त) में कृष्ण चतुर्दशी हो।
- संकष्टी चतुर्थी (कृष्ण पक्ष) उस दिन होती है जिस दिन चन्द्रोदय के समय चतुर्थी हो; व्रत चन्द्रोदय पर चन्द्र-दर्शन व अर्घ्य से पूर्ण होता है; विनायक चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) की पूजा मध्याह्न (दिन का तीसरा पाँचवाँ भाग) में।