नामकरण संस्कार
शिशु का नामकरण
जन्म के समय चन्द्रमा जिस नक्षत्र-चरण में हो, उसी के अक्षर से नाम रखने की परम्परा है। जन्म विवरण दें — नामाक्षर और उसी अक्षर के पारम्परिक नाम, अर्थ सहित।
प्रसव का समय सदैव डॉक्टर ही तय करें — माँ और शिशु की सुरक्षा सबसे पहले है। डॉक्टर जो विकल्प सुरक्षित बताएँ, उनमें से चुनने में यह सूची सहायता कर सकती है।
गणना के नियम
- त्याज्य: गण्डमूल नक्षत्र (अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती), अमावस्या, भद्रा, व्यतीपात-वैधृति योग, राहुकाल, और लग्न से आठवें भाव में चन्द्रमा।
- शुभता: लग्नेश केन्द्र-त्रिकोण में, बृहस्पति केन्द्र-त्रिकोण में, चन्द्रमा केन्द्र-त्रिकोण में या उच्च/स्वराशि में, बढ़ता चन्द्रमा, लग्न में शुभ ग्रह; लग्न में पाप ग्रह अंक घटाते हैं।
- ये सामान्य मुहूर्त-संकेत हैं, सम्पूर्ण कुण्डली का फल नहीं। निर्णय से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लें।